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छोटी छोटी बातें कर के, बड़े कहाँ हो जाओगे पतली गलियों से निकलो तो खुली सड़क पर आओगे

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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी

Ankita Singh

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जहान भर में न हो मुयस्सर जो कोई शाना, हमें बताना नहीं मिले गर कोई ठिकाना तो लौट आना, हमें बताना कुछ ऐसी बातें जो अनकही हों, मगर वो अंदर से खा रही हों लगे किसी को बताना है पर नहीं बताना, हमें बताना

Vikram Gaur Vairagi

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किसी से छोटी सी एक उम्मीद बाँध लीजिए मोहब्बतों का अगर जनाज़ा निकालना है

Shakeel Jamali

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कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है

Waseem Barelvi

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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं

Jawwad Sheikh

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