आख़री सीन बेवफ़ाई थी तुझ को जाना ही था कहानी से
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया
Tehzeeb Hafi
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ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर बारिशें हों तो भीग जाया कर काम ले कुछ हसीन होंठों से बातों बातों में मुस्कुराया कर
Shakeel Azmi
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जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
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ये वजूद-ए-इश्क़ तुझ को रब मिटाना ही पड़ेगा हुस्न के हाथों वफ़ा होता है रुस्वा देख हर पल
A R Sahil "Aleeg"
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ये पहेली अज़ल से उलझी है है बुरा हुस्न या है इश्क़ बुरा
A R Sahil "Aleeg"
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वो गिरफ़्तार जो करे तो फिर गेसुओं के क़फ़स में मर जाए ये तमन्ना है एक आशिक़ की इश्क़ की दस्तरस में मर जाए
A R Sahil "Aleeg"
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नहीं बदलती है इस इश्क़ की कहानी कभी फ़क़त बदलते हैं किरदार इस कहानी के
A R Sahil "Aleeg"
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न बदली है ज़मीं ये और ये अंबर नहीं बदला तुम्हारी याद बसती है तभी तो घर नहीं बदला कहीं ऐसा न हो तुम याद कर लो इस सबब हम ने बहुत बदले हैं मोबाइल मगर नंबर नहीं बदला
A R Sahil "Aleeg"
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