आलम में कहीं बादल ख़ूब बरसते हैं जन्नत में कहीं राहत शे'र सुनाते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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वो जिस तरह से नाम मेरा लेती है मुझे लगता है मेरे होने से दुनिया जहान है
Gaurav Singh
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उस के झुमके की बात क्या कीजे उस की बातें भी यार गहना हैं
Gaurav Singh
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तुम्हारी याद के गहरे भँवर में तख़य्युल रक़्स करना चाहता है
Gaurav Singh
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तुम्हारा पहलू तुम्हारी मर्ज़ी जिसे भी चाहो बिठाओ इस में मगर मेरी जाँ हमारे दिल का हुआ तमाशा तो याद रखना
Gaurav Singh
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सो जाने दो आज मुझे अब देर हुई रात तुम्हारा रोना अब कल सुनते हैं
Gaurav Singh
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