आँख दरिया बने पर तमाशा न हो जो हुआ सो हुआ घर तमाशा न हो दिल भी टूटे अगर टूटे फिर इस क़दर बात अंदर हो बाहर तमाशा न हो
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
Jigar Moradabadi
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ज़ब्त-ए-औक़ात भी औक़ात में आ जाता है बात उस की हो तो दिल बात में आ जाता है मौसम-ए-गुल भी बहाना है नहीं आने को आने वाला भरी बरसात में आ जाता है
Janib Vishal
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किसी ने जब गए दिन का पता पूछा लगा ऐसा कि कोई हादिसा पूछा हमीं थे राह भटके लोग हैरत है हमीं से मंज़िलों ने रास्ता पूछा
Janib Vishal
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वहीं घर फ़ोन से वो प्यार देती है मुझे अपना बिगाड़ा हो गया इतना कि मिलने आ नहीं सकती
Janib Vishal
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मैं नहीं मानता जा तिरी बंदगी तू ख़ुदा है अगर सामने आ के मिल
Janib Vishal
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यार तुझ को ख़ुदा का हवाला न दे ज़हर दे रुख़्सती का पियाला न दे क़ब्र मंज़ूर है तेरे दिल में मगर इस तरह इश्क़ को दिल निकाला न दे
Janib Vishal
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