मैं नहीं मानता जा तिरी बंदगी तू ख़ुदा है अगर सामने आ के मिल
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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ये जो मैं हूँ तुम्हारा हूँ तुम्हारा बस तुम्हारा ये जो तुम हो जहाँ के हो मगर मेरे नहीं हो
Janib Vishal
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ज़ब्त-ए-औक़ात भी औक़ात में आ जाता है बात उस की हो तो दिल बात में आ जाता है मौसम-ए-गुल भी बहाना है नहीं आने को आने वाला भरी बरसात में आ जाता है
Janib Vishal
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ये बहार-ए-सोग के ग़मनाक मंज़र मिल रहे हैं हम अगर ख़ुश मिल रहे तो ग़म छुपाकर मिल रहे हैं
Janib Vishal
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किसी ने जब गए दिन का पता पूछा लगा ऐसा कि कोई हादिसा पूछा हमीं थे राह भटके लोग हैरत है हमीं से मंज़िलों ने रास्ता पूछा
Janib Vishal
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जो राज़ दिल में है दबा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर मैं ज़िंदगी को भी दगा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर तेरा वो बोसा अब भी मेरी अक़्ल से जाता नहीं हर इक निशां तेरा मिटा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर
Janib Vishal
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