जो राज़ दिल में है दबा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर मैं ज़िंदगी को भी दगा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर तेरा वो बोसा अब भी मेरी अक़्ल से जाता नहीं हर इक निशां तेरा मिटा दूँगा कफ़न को ओढ़ कर
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी ने जब गए दिन का पता पूछा लगा ऐसा कि कोई हादिसा पूछा हमीं थे राह भटके लोग हैरत है हमीं से मंज़िलों ने रास्ता पूछा
Janib Vishal
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ये जो मैं हूँ तुम्हारा हूँ तुम्हारा बस तुम्हारा ये जो तुम हो जहाँ के हो मगर मेरे नहीं हो
Janib Vishal
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ज़ब्त-ए-औक़ात भी औक़ात में आ जाता है बात उस की हो तो दिल बात में आ जाता है मौसम-ए-गुल भी बहाना है नहीं आने को आने वाला भरी बरसात में आ जाता है
Janib Vishal
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ये बहार-ए-सोग के ग़मनाक मंज़र मिल रहे हैं हम अगर ख़ुश मिल रहे तो ग़म छुपाकर मिल रहे हैं
Janib Vishal
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मैं नहीं मानता जा तिरी बंदगी तू ख़ुदा है अगर सामने आ के मिल
Janib Vishal
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