आओ कि दूसरी किसी कश्ती का रुख़ करें इस नाव में कुछ भी नहीं आज़ार के सिवा
Related Sher
किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
162 likes
भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
105 likes
लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में
nakul kumar
88 likes
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
Gulzar
88 likes
मैं किसी तरह भी समझौता नहीं कर सकता या तो सब कुछ ही मुझे चाहिए या कुछ भी नहीं
Jawwad Sheikh
89 likes
More from Shivam chaubey
हमारे साथ भी रह कर नहीं पिघल पाया नदी की क़ुर्ब में पत्थर नहीं हुआ पानी
Shivam chaubey
0 likes
जैसे कि फूल शाख के और चाँद ईद के हम भी तो साथ-साथ हैं पर उस तरह नहीं
Shivam chaubey
0 likes
नहीं मिलते हैं मेरे लोग वैसे मिले सूरज-मुखी जैसे किरन से
Shivam chaubey
0 likes
ज़हर होता है सबके जिस्मों में नब्ज़ यूँँ ही हरी नहीं होती
Shivam chaubey
1 likes
उस की लुगत में सब्र का मतलब क्या होगा मेरी लुगत में सब्र का मतलब धोखा है
Shivam chaubey
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shivam chaubey.
Similar Moods
More moods that pair well with Shivam chaubey's sher.







