आप हो जाएँ जुदा मुझ को गवारा ही नहीं आप कहते हैं करो ये भी गवारा तौबा
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ज़मीं नीचे न ऊपर आसमाँ है कहाँ हम लोग लाए जा रहे हैं
Shadab Shabbiri
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तेरी आँखों में डूब कर इक दिन जी में आता है ख़ुद-कुशी कर लूँ
Shadab Shabbiri
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ज़माना तो उठाना चाहता है मैं पैर अपने जमाना चाहता हूँ
Shadab Shabbiri
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थी किताबी किताब में गुज़री ज़िन्दगी सारी ख़्वाब में गुज़री उस के दरबार से रहा रिश्ता उम्र बस जी जनाब में गुज़री
Shadab Shabbiri
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वो बहुत ही महान है भाई ये फ़क़त इक गुमान है भाई
Shadab Shabbiri
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