आप सुलझे नहीं कि हम उलझे बात उलझी मेरे करम उलझे सच में ख़्वाहिश है मेरी ये ग़ालिब तेरे हाथों मिरी रक़म उलझे
Related Sher
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
333 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
388 likes
More from Raushan miyaa'n
यूँँ तलब है हमें आप की रात में इक मुसाफ़िर को जूँ रौशनी चाहिए
Raushan miyaa'n
0 likes
वो मिरे दीद को तरसते क्यूँँ ऐब गर उन को ये पता होता
Raushan miyaa'n
0 likes
सदाओं के पीछे तिरी हम बने फिरे हैं मुसाफ़िर यहाँ से वहाँ
Raushan miyaa'n
0 likes
तुम अलग हो यार उन सब बाक़ियों से इश्क़ तुम से है था मतलब बाक़ियों से तेरे दीवाने का आशिक़ का तिरे यूँँ मुख़्तलिफ़ क्यूँँ फ़ैसला रब बाक़ियों से
Raushan miyaa'n
0 likes
रात भर चुभता है तन्हाई का ख़ंजर मुझ को एक शाइ'र ने कहा था कभी शाइ'र मुझ को
Raushan miyaa'n
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Raushan miyaa'n.
Similar Moods
More moods that pair well with Raushan miyaa'n's sher.







