आक़िबत तक आदमी में सिर्फ़ पत्थर रह गया देख कर हैरान हूँ ये लाश डूबी क्यूँँ नहीं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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कहो यार 'कालिख़' कि क्या ही करोगे मुसलसल करेंगे सफ़र ज़िंदगी भर
Saurabh Yadav Kaalikhh
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यहाँ चेहरे सभी जैसे भरी ‘कालिख़’ बचे कुछ साफ़ उन में रंग भरने दो
Saurabh Yadav Kaalikhh
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उम्र भर वो दूसरों की ही बनाता था छतें ऐ ख़ुदा मज़दूर की दीवार पक्की क्यूँँ नहीं
Saurabh Yadav Kaalikhh
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किया बस इधर से उधर ज़िंदगी भर भटकते रहे दर बदर ज़िंदगी भर
Saurabh Yadav Kaalikhh
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ज़िंदगी में मोड़ कालिख़ आगे ऐसे आएँगे याद बातें आएँगी बिन ध्यान जो सुनता रहा
Saurabh Yadav Kaalikhh
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