उम्र भर वो दूसरों की ही बनाता था छतें ऐ ख़ुदा मज़दूर की दीवार पक्की क्यूँँ नहीं
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तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
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गुनाहगार को इतना पता तो होता है जहाँ कोई नहीं होता ख़ुदा तो होता है
Waseem Barelvi
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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आँख हो बंद तो वो अपना है आँख खुल जाए तो वो सपना है वो मिले या नहीं मिले हम को उम्र भर उस का नाम जपना है
Sandeep Thakur
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के 'हैलो' सुनते ही कट कर दिया है उस ने मेरा फ़ोन ख़ुदा का शुक्र है आवाज़ तो पहचानता है वो
Zubair Ali Tabish
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ज़िंदगी में मोड़ कालिख़ आगे ऐसे आएँगे याद बातें आएँगी बिन ध्यान जो सुनता रहा
Saurabh Yadav Kaalikhh
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ज़ख़्मी से दिन हैं आजकल 'कालिख़' यहाँ तुम याद जाने इस क़दर क्यूँँ आ रहे
Saurabh Yadav Kaalikhh
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लखनऊ में आप जैसे ही पधारो और बस मुस्कुराओ बिन तराज़ू तोल मेरे शहर में
Saurabh Yadav Kaalikhh
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कहो यार 'कालिख़' कि क्या ही करोगे मुसलसल करेंगे सफ़र ज़िंदगी भर
Saurabh Yadav Kaalikhh
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तीरगी थी रास्तों में और भटका मैं बहुत रौशनी पाई गुरू से जब कभी गिरता रहा
Saurabh Yadav Kaalikhh
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