तीरगी थी रास्तों में और भटका मैं बहुत रौशनी पाई गुरू से जब कभी गिरता रहा
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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कहो यार 'कालिख़' कि क्या ही करोगे मुसलसल करेंगे सफ़र ज़िंदगी भर
Saurabh Yadav Kaalikhh
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ज़िंदगी में मोड़ कालिख़ आगे ऐसे आएँगे याद बातें आएँगी बिन ध्यान जो सुनता रहा
Saurabh Yadav Kaalikhh
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ज़ख़्मी से दिन हैं आजकल 'कालिख़' यहाँ तुम याद जाने इस क़दर क्यूँँ आ रहे
Saurabh Yadav Kaalikhh
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थे बहुत शाही से उस के शौक़ मैं क्या बोलता जान को पिस्ता खिलाने में यहाँ पिसता रहा
Saurabh Yadav Kaalikhh
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जंग होगी तो पड़ेंगे जानवर अब भेजने आशिक़ी की यार तैयारी यहाँ घर घर चले
Saurabh Yadav Kaalikhh
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