आसरा था दिया जिस शज़र ने कभी क्यूँँ उड़ा फिर परिंदा उसे छोड़ कर
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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दुआ की है मिले वो प्यार दामन में बहाएंँ अश्क जिस सरशार दामन में न आओ पास के आँखें मिरी हैं नम कि है कुछ दर्द इस गम-ख़्वार दामन में
Chandan Mishra
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ये जुगनू रात को लड़ बैठते हैं रोज़ तारों से वही सूरज से डर कर क्यूँँ बग़ावत छोड़ देते हैं
Chandan Mishra
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चलो , तुम कह रहे हो गर, तो आदत छोड़ देते हैं तुम्हारे ही लिए तुम सेे मुहब्बत छोड़ देते हैं हमारे इश्क़ को वहशत समझने लग गए तो फिर बिलखते ख़्वाब , ख़ामोशी ये वहशत छोड़ देते हैं
Chandan Mishra
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