आसमाँ आज़ाद रखता है हवा को वो मुझे तो क़ैद करती जा रही है
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दो गज़ सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है ऐ मौत तू ने मुझे ज़मींदार कर दिया
Rahat Indori
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो आसमाँ लाए हो ले आओ ज़मीं पर रख दो
Rahat Indori
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देरी से समझोगे इनका साथ मगर तुम क्या जानो ऐसे लोगों का होना जो ख़ूब अकेले रहते हैं
Abhay Mishra
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हम भी उसी अंजाम पे आ कर हुए ख़ुद से फ़ना जिस मोड़ के आगे समुंदर के सिवा कुछ भी नहीं
Abhay Mishra
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यही बस याद रखना है तुझे अब लगेगा पर उसे कहना नहीं है
Abhay Mishra
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गुल-बदन तू बस मुझे इतना बता दे मैं तुझे छू कर भी क्यूँ ज़िंदा नहीं हूँ
Abhay Mishra
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उन लबों को चूम कर पगला गया हूँ एक बोसा ये क़यामत कर रहा है
Abhay Mishra
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