आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है मुमकिन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जाए
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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ऐ देखने वालो मुझे हँस हँस के न देखो तुम को भी मोहब्बत कहीं मुझ सा न बना दे
Behzad Lakhnavi
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मैं ढूँढ़ रहा हूँ मिरी वो शम्अ' कहाँ है जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे
Behzad Lakhnavi
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मुझे तो होश न था उन की बज़्म में लेकिन ख़मोशियों ने मेरी उन से कुछ कलाम किया
Behzad Lakhnavi
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वफ़ाओं के बदले जफ़ा कर रहे हैं मैं क्या कर रहा हूँ वो क्या कर रहे हैं
Behzad Lakhnavi
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ज़िंदा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं जलता हुआ दिया हूँ मगर रौशनी नहीं
Behzad Lakhnavi
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