अच्छा किया जो छोड़ दिया साथ हमारा कब तक सॅंभालते ये दिल-ए-बेक़रार को
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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फफोले पड़ चुके आँखों में ज़ौक़-ए-दीद बाक़ी है बहुत है दूर तू मुझ सेे मगर उम्मीद बाक़ी है मेरी जाँ लौट के आजा दिल-ए-बीमार की ख़ातिर सभी की हो गई है ईद मेरी ईद बाक़ी है
SALIM RAZA REWA
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ज़ख़्म सिलने में कई ज़ख़्म दिए टाँकों ने कौन से दर्द का इज़हार करूँँ मैं पहले चोट खाया है मेरे जिस्म का हर-इक हिस्सा कौन से हिस्से को बीमार करूँँ मैं पहले
SALIM RAZA REWA
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तेरे दीदार से आँखों को सुकूँ मिलता है ख़ुद से कर-कर के कई बार बहाने आए
SALIM RAZA REWA
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उस की हर इक अदा पे तो क़ुर्बान जाइए मौसम को जिस ने छू के नशीला बना दिया
SALIM RAZA REWA
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टूटा-फूटा गिरा पड़ा कुछ तंग सही अपना घर तो अपना ही घर होता है ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें कितना सुंदर गाँव का मंज़र होता है
SALIM RAZA REWA
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