sherKuch Alfaaz

अच्छा किया जो छोड़ दिया साथ हमारा कब तक सॅंभालते ये दिल-ए-बेक़रार को

More from SALIM RAZA REWA

फफोले पड़ चुके आँखों में ज़ौक़-ए-दीद बाक़ी है  बहुत है दूर तू मुझ सेे मगर उम्मीद बाक़ी है  मेरी जाँ लौट के आजा दिल-ए-बीमार की ख़ातिर सभी की हो गई है ईद मेरी ईद बाक़ी है

SALIM RAZA REWA

0 likes

ज़ख़्म सिलने में कई ज़ख़्म दिए टाँकों ने कौन से दर्द का इज़हार करूँँ मैं पहले चोट खाया है मेरे जिस्म का हर-इक हिस्सा कौन से हिस्से को बीमार करूँँ मैं पहले

SALIM RAZA REWA

1 likes

तेरे दीदार से आँखों को सुकूँ मिलता है ख़ुद से कर-कर के कई बार बहाने आए

SALIM RAZA REWA

1 likes

उस की  हर इक अदा पे तो क़ुर्बान जाइए         मौसम को जिस ने छू के नशीला बना दिया

SALIM RAZA REWA

1 likes

टूटा-फूटा गिरा पड़ा कुछ तंग सही 
 अपना घर तो अपना ही घर होता है

 ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें 
 कितना सुंदर गाँव का मंज़र होता है

SALIM RAZA REWA

1 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on SALIM RAZA REWA.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with SALIM RAZA REWA's sher.