sherKuch Alfaaz

ज़ख़्म सिलने में कई ज़ख़्म दिए टाँकों ने कौन से दर्द का इज़हार करूँँ मैं पहले चोट खाया है मेरे जिस्म का हर-इक हिस्सा कौन से हिस्से को बीमार करूँँ मैं पहले

More from SALIM RAZA REWA

अच्छा किया जो छोड़ दिया साथ हमारा कब तक सॅंभालते ये दिल-ए-बेक़रार को

SALIM RAZA REWA

0 likes

वो जिसे चाहे अता कर दे ज़माने की ख़ुशी उस के ही हाथों में हैं सारे जहाँ की नेमतें

SALIM RAZA REWA

1 likes

शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

SALIM RAZA REWA

0 likes

मुझ को तिजारतों में ख़सारा नहीं हुआ ये और बात है कि गुज़ारा नहीं हुआ ये सोच कर मैं ख़ुश हूँ कि ग़ुरबत में भी मुझे लालच-दग़ा-फ़रेब गवारा नहीं हुआ

SALIM RAZA REWA

0 likes

उन के दर पर सलाम कह देना मैं हूँ उन का ग़ुलाम कह देना उन सेे मिलने की दिल में ख़्वाहिश है मेरा इतना पयाम कह देना

SALIM RAZA REWA

1 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on SALIM RAZA REWA.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with SALIM RAZA REWA's sher.