sherKuch Alfaaz

मुझ को तिजारतों में ख़सारा नहीं हुआ ये और बात है कि गुज़ारा नहीं हुआ ये सोच कर मैं ख़ुश हूँ कि ग़ुरबत में भी मुझे लालच-दग़ा-फ़रेब गवारा नहीं हुआ

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

Tehzeeb Hafi

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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं

Umair Najmi

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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं

Jaun Elia

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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा

Ahmad Faraz

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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा

Tehzeeb Hafi

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ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें कितना सुंदर गाँव का मंज़र होता है टूटा फूटा गिरा पड़ा कुछ तंग सही अपना घर तो अपना ही घर होता है

SALIM RAZA REWA

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शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

SALIM RAZA REWA

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ये वज़ीफ़ा मेरा सुब्ह-ओ-शाम है मेरे लब पर सिर्फ़ तेरा नाम है मेरा घर ख़ुशियों से है फूला फला मेरे रब का ये बड़ा इन'आम है

SALIM RAZA REWA

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उम्र भर मुश्किलें सहता है वो बच्चों के लिए अपनी सब ख़्वाहिशें मिट्टी में दबा देता है हर ख़ुशी छोड़ के परदेस में अपनों के लिए क़तरा क़तरा वो पसीने का बहा देता है

SALIM RAZA REWA

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शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

SALIM RAZA REWA

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