उम्र भर मुश्किलें सहता है वो बच्चों के लिए अपनी सब ख़्वाहिशें मिट्टी में दबा देता है हर ख़ुशी छोड़ के परदेस में अपनों के लिए क़तरा क़तरा वो पसीने का बहा देता है
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम हैं ना! ये जो मुझ सेे कहते हैं ख़ुद किसी और के भरोसे हैं ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ ख़ुद-कुशी के तो सौ तरीक़े हैं
Vikram Gaur Vairagi
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जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है
SALIM RAZA REWA
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इन दरिंदों को भी सूली पे चढ़ाया जाए बोटियाँ काट के कुत्तों को खिलाया जाए ताकि कोई भी इलाक़ा न पहलगाम बने इस तरह हिन्द से दुश्मन को मिटाया जाए
SALIM RAZA REWA
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जी भर के मुझ को नाच नचा ले तू ज़िंदगी मैं ने भी घुँघरू बाँध लिए अपने पाँव में
SALIM RAZA REWA
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ये वज़ीफ़ा मेरा सुब्ह-ओ-शाम है मेरे लब पर सिर्फ़ तेरा नाम है मेरा घर ख़ुशियों से है फूला फला मेरे रब का ये बड़ा इन'आम है
SALIM RAZA REWA
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फफोले पड़ चुके आँखों में ज़ौक़-ए-दीद बाक़ी है बहुत है दूर तू मुझ सेे मगर उम्मीद बाक़ी है मेरी जाँ लौट के आजा दिल-ए-बीमार की ख़ातिर सभी की हो गई है ईद मेरी ईद बाक़ी है
SALIM RAZA REWA
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