ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें कितना सुंदर गाँव का मंज़र होता है टूटा फूटा गिरा पड़ा कुछ तंग सही अपना घर तो अपना ही घर होता है
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़रा सी बात पे रिश्तों को कर दिया घाइल ज़रा सी बात को ले कर उदास बैठे हैं तेरे बग़ैर हर इक शय की आँख पुरनम है हमीं नहीं मह-ओ-अख़्तर उदास बैठे हैं
SALIM RAZA REWA
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ये है दुआ तुम्हारा मुक़द्दर बुलंद हो तुम को तमाम उम्र ख़ुशी ही ख़ुशी मिले
SALIM RAZA REWA
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सब ख़्वाहिशें लपेट के पेटी में रख दिया उम्मीद जो बची थी वो खूँटी पे टाँग दी
SALIM RAZA REWA
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तेरे ही प्यार की ख़ुशबू हमेशा साथ रहती है तेरी यादों के लश्कर ने कभी तन्हा नहीं छोड़ा
SALIM RAZA REWA
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उन के दर पर सलाम कह देना मैं हूँ उन का ग़ुलाम कह देना उन सेे मिलने की दिल में ख़्वाहिश है मेरा इतना पयाम कह देना
SALIM RAZA REWA
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