टूटा-फूटा गिरा पड़ा कुछ तंग सही अपना घर तो अपना ही घर होता है ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें कितना सुंदर गाँव का मंज़र होता है
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं दिल हमेशा उदास रहता है
Bashir Badr
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
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मुझ को तिजारतों में ख़सारा नहीं हुआ ये और बात है कि गुज़ारा नहीं हुआ ये सोच कर मैं ख़ुश हूँ कि ग़ुरबत में भी मुझे लालच-दग़ा-फ़रेब गवारा नहीं हुआ
SALIM RAZA REWA
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ये है दुआ तुम्हारा मुक़द्दर बुलंद हो तुम को तमाम उम्र ख़ुशी ही ख़ुशी मिले
SALIM RAZA REWA
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शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है
SALIM RAZA REWA
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तब मुझे दर्द का एहसास बहुत होता है जब मेरी लख़्त-ए-जिगर आँख भिगो लेती है
SALIM RAZA REWA
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इन दरिंदों को भी सूली पे चढ़ाया जाए बोटियाँ काट के कुत्तों को खिलाया जाए ताकि कोई भी इलाक़ा न पहलगाम बने इस तरह हिन्द से दुश्मन को मिटाया जाए
SALIM RAZA REWA
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