sherKuch Alfaaz

टूटा-फूटा गिरा पड़ा कुछ तंग सही 
 अपना घर तो अपना ही घर होता है

 ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें 
 कितना सुंदर गाँव का मंज़र होता है

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मुझ को तिजारतों में ख़सारा नहीं हुआ ये और बात है कि गुज़ारा नहीं हुआ ये सोच कर मैं ख़ुश हूँ कि ग़ुरबत में भी मुझे लालच-दग़ा-फ़रेब गवारा नहीं हुआ

SALIM RAZA REWA

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ये है दुआ तुम्हारा मुक़द्दर बुलंद हो तुम को तमाम उम्र ख़ुशी ही ख़ुशी मिले

SALIM RAZA REWA

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शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

SALIM RAZA REWA

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तब मुझे दर्द का एहसास बहुत होता है जब मेरी लख़्त-ए-जिगर आँख भिगो लेती है

SALIM RAZA REWA

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इन दरिंदों को भी सूली पे चढ़ाया जाए बोटियाँ काट के कुत्तों को खिलाया जाए ताकि कोई भी इलाक़ा न पहलगाम बने इस तरह हिन्द से दुश्मन को मिटाया जाए

SALIM RAZA REWA

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