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अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है

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हमेशा इक दूसरे के हक़ में दुआ करेंगे ये तय हुआ था मिलें या बिछड़ें मगर तुम्हीं से वफ़ा करेंगे ये तय हुआ था

Shabeena Adeeb

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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा

Santosh S Singh

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रंग की अपनी बात है वर्ना आख़िरश ख़ून भी तो पानी है

Jaun Elia

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मैं रस्मन कह रहा हूँ ''फिर मिलेंगे'' ये मत समझो कि वा'दा कर रहा हूँ

Zubair Ali Tabish

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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त

Ali Zaryoun

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