एक माहौल ही तो बदला है आप रोने पे आ गए साहिब
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कितना महफ़ूज़ हूँ मैं कोने में कोई अड़चन नहीं है रोने में मैं ने उस को बचा लिया वरना डूब जाता मुझे डुबोने में
Fahmi Badayuni
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तुम सेे जो मिला हूँ तो मेरा हाल है बदला पतझड़ में भी जैसे के कोई फूल खिला हो
Haider Khan
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अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का
Javed Akhtar
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सारे ग़म भूल गए आप के रोने पे मुझे किस को ठंडक में पसीने का ख़याल आता है आखरी उम्र में जाते है मदीने हम लोग मरने लगते है तो जीने का ख़याल आता है
Nadir Ariz
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रोने को तो ज़िंदगी पड़ी है कुछ तेरे सितम पे मुस्कुरा लें
Firaq Gorakhpuri
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तुम्हें मुझ सेे मोहब्बत हो गई है अरे पहले बताना चाहिए था
Shivsagar Sahar
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बात अधूरी रह जाती अक्सर मेरी तुम कहती हो जल्दी-जल्दी बोलो ना
Shivsagar Sahar
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इक ऐसा माहौल बनाया है हम ने बच्चे हँसते हँसते पढ़ने आते हैं
Shivsagar Sahar
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कभी तो अपनी तरफ़ भी देखो वफ़ा जो हम को सिखा रहे हो
Shivsagar Sahar
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दिल पे सिक्का जमा नहीं पाया इतनी हिम्मत जुटा नहीं पाया मेरी इस आशिक़ी पे लानत है उस को पागल बना नहीं पाया
Shivsagar Sahar
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