ajab nahin ki ye dariya nazar ka dhoka ho ajab nahin ki koi rasta nikal aae
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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मैं ख़्वाब देख रहा हूँ कि वो पुकारता है और अपने जिस्म से बाहर निकल रहा हूँ मैं
Irfan Siddiqi
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उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए
Irfan Siddiqi
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एक मैं हूँ कि इस आशोब-ए-नवा में चुप हूँ वर्ना दुनिया मेरे ज़ख़्मों की ज़बाँ बोलती है
Irfan Siddiqi
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देखते हैं तो लहू जैसे रगें तोड़ता है हम तो मर जाएँगे सीने से लगा कर उस को
Irfan Siddiqi
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नहीं तो बर्फ़ सा पानी तुम्हें जला देगा गिलास लेते हुए उँगलियाँ न छू लेना
Irfan Siddiqi
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