और आसान नहीं हो सकता फ़रियादों को पूरा करना एक ही आस लगा रक्खी है, ख़ुदा सभी बंदों ने तुझ सेे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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`तू मेरे पास आ कर बैठ मुझ सेे बात कर ऐ दोस्त ये मुमकिन है कोई दरिया ख़राबों से निकल आए
Siddharth Saaz
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भले ही प्यार हो या हिज्र हो या फिर सियासत हो कुछ ऐसे दोस्त थे हर बात पर अश'आर कहते थे
Siddharth Saaz
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हर तरफ़ उग आए हैं जंगल हमारी हार के जीत का कोई भी रस्ता अब नहीं दिखता हमें
Siddharth Saaz
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बारिश हो जाने के बा'द भी मिट्टी गीली रहती है मैं तेरे जाने के बा'द भी तुझ सेे बातें करता हूँ
Siddharth Saaz
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मैं ने चाहा भी कि फिर इस संग-दिल पे फूल उगे पर तुम्हारी रुख़्सती के बा'द ये होता नहीं
Siddharth Saaz
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