और कुछ देर ठहर दिन का निकलना तय है वक़्त बदलेगा मेरी जान, बदलना तय है
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं
Umair Najmi
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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यहाँ से बाज़ चीज़ों को हटा दो नज़र पड़ने पे याद आती है उस की
Nasir khan 'Nasir'
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बदलना वक़्त ने सीखा है तुम सेे घड़ी से पहले की ईजाद हो तुम
Nasir khan 'Nasir'
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उस की यादों कि तंगदस्ती में अब ग़ज़ल रोज़गार है अपना
Nasir khan 'Nasir'
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तितलियाँ यूँँ ही नहीं बैठ रही हैं तुम पर बारहा तुम को भी फूलों में गिना जाता है
Nasir khan 'Nasir'
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मुहब्बत दुसरी कोशिश में पहली मर्तबा होगी वही स्कूल की लड़की मेरे कॉलेज में आई है
Nasir khan 'Nasir'
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