उस की यादों कि तंगदस्ती में अब ग़ज़ल रोज़गार है अपना
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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बदलना वक़्त ने सीखा है तुम सेे घड़ी से पहले की ईजाद हो तुम
Nasir khan 'Nasir'
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यहाँ से बाज़ चीज़ों को हटा दो नज़र पड़ने पे याद आती है उस की
Nasir khan 'Nasir'
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ये हक़ीक़त-पसंद लोग भी ना ख़्वाब देखो तो मार देते हैं
Nasir khan 'Nasir'
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मुहब्बत दुसरी कोशिश में पहली मर्तबा होगी वही स्कूल की लड़की मेरे कॉलेज में आई है
Nasir khan 'Nasir'
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और कुछ देर ठहर दिन का निकलना तय है वक़्त बदलेगा मेरी जान, बदलना तय है
Nasir khan 'Nasir'
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