ये हक़ीक़त-पसंद लोग भी ना ख़्वाब देखो तो मार देते हैं
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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यहाँ से बाज़ चीज़ों को हटा दो नज़र पड़ने पे याद आती है उस की
Nasir khan 'Nasir'
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बदलना वक़्त ने सीखा है तुम सेे घड़ी से पहले की ईजाद हो तुम
Nasir khan 'Nasir'
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उस की यादों कि तंगदस्ती में अब ग़ज़ल रोज़गार है अपना
Nasir khan 'Nasir'
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तितलियाँ यूँँ ही नहीं बैठ रही हैं तुम पर बारहा तुम को भी फूलों में गिना जाता है
Nasir khan 'Nasir'
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और कुछ देर ठहर दिन का निकलना तय है वक़्त बदलेगा मेरी जान, बदलना तय है
Nasir khan 'Nasir'
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