maujuda nizaam ke tahat jiski baag-dor sirf mardon ke haath mein hai, aurat khwaah woh ismat-farosh ho ya ba-ismat, hamesha dabi rahi hai. mard ko maujooda akhtiyaar hoga ki woh uske mutalliq jo chaahe raae qayam kare.
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दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था तालों की ईजाद से पहले सिर्फ़ भरोसा होता था
Azhar Faragh
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वो हक़ीक़त को किस तरह समझे वहम ने जिस की परवरिश की हो
Kaif Uddin Khan
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काम से ही सिर्फ़ आता ये जहाँ बस पास में सब परख कर ही तो ख़ुद से, जोड़ते हम हैं तुझे
Divya 'Kumar Sahab'
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आग अपने ही लगा सकते हैं ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
Mohammad Alvi
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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ज़ीस्त में मेरे उस ने अँधेरा किया और उस को सभी 'रौशनी' कहते थे
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वो मुंसिफ़ है मेरा जो क़ातिल है जाँ का मेरे हक़ में वो फ़ैसला क्या करेगा
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ज़रा तुम अपनी हद में रहने की कोशिश करो वरना तुम्हारे ऐब से इक दिन तुम्हें बदनाम कर देंगे
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सिखाया है तुम्हीं ने इश्क़ करना मुझ को शिद्दत से मुहब्बत में तुम्हारा ज़िक्र लाज़िम है मेरी जानाँ
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सिर्फ़ इस लिए ही लिखता हूँ उसे मैं रोज़ ख़त ताकि उस में बे-झिझक "तुम्हारा अपना" लिख सकूँ
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