अज़ानों में, भजन में आप उलझें हमें प्यारा है जन-गण-मन हमारा
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है मिल जाए तो बात वगैरा करती है बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है रोने में आसानी पैदा करती है
Tehzeeb Hafi
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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वो बस रस्मन लेे लेता है राय मेरी करनी उस को हरदम अपनी होती है
Ankit Maurya
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वो ग़ुस्से में सीधी बात नहीं करता तूफ़ानों में बारिश तिरछी होती है
Ankit Maurya
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जीत भी लूँ गर लड़ाई तुम से मैं तो क्या मिलेगा हाथ में दोनों के बस इक टूटा सा रिश्ता मिलेगा कर के लाखों कोशिशें गर जो बचा भी लूँ मैं रिश्ता तो नहीं फिर मन हमारा पहले के जैसा मिलेगा
Ankit Maurya
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हर घड़ी कर रही नज़दीक बिछड़ने के मुझे घड़ी मुझ सेे तेरा चलना नहीं देखा जाता
Ankit Maurya
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ग़ुस्से में कह रही है न छोडूँगी मैं तुम्हें मैं चाहता भी हूँ कभी छोड़े न वो मुझे
Ankit Maurya
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