ba-pas-e-dil jise apne labon se bhi chhupaya tha mera wo raaz tere hijr ne pahuncha diya sab tak
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना क़ुबूल हम ने किए जिस के ग़म ख़ुशी की तरह कभी न सोचा था हम ने 'क़तील' उस के लिए करेगा हम पे सितम वो भी हर किसी की तरह
Qateel Shifai
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तेज़ धूप में आई ऐसी लहर सर्दी की मोम का हर इक पुतला बच गया पिघलने से
Qateel Shifai
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सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने वो फ़साना जो कभी हम ने सुनाया भी नहीं
Qateel Shifai
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खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें
Qateel Shifai
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जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ जाने क्यूँँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं
Qateel Shifai
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