बात जो भी है साफ़ करती हूँ जुर्म का एतिराफ़ करती हूँ इश्क़ है बालातर मोहब्बत में ऐन में शीन क़ाफ़ करती हूँ
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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हर चीज़ पे छाई है उदासी ही उदासी अब घर मेरे आई है उदासी ही उदासी
Arohi Tripathi
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दाग़ दामन पर तुम्हारे जब लगे ये न तुम भी देख पाए कब लगे ठीक उस ने तब निशाना तय किया तीर सीने में तुम्हारे जब लगे
Arohi Tripathi
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शाहज़ादी ख़बर नहीं तुझ को तुझ पे कितने ग़ुलाम मरते हैं
Arohi Tripathi
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क्या ही बताऊँ मैं तुम्हें क्या हाल था मेरा उस ने लबों को चूम के हालत ख़राब की
Arohi Tripathi
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शाहज़ादे पता नहीं तुम को तुम पे कितनी कनीज़ मरती हैं
Arohi Tripathi
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