बात करते हुए बे-ख़याली में ज़ुल्फ़ें खुली छोड़ दी हम निहत्थों पे उस ने ये कैसी बलाएँ खुली छोड़ दी साथ जब तक रहे एक लम्हे को भी रब्त टूटा नहीं उस ने आँखें अगर बंद कर ली तो बाँहें खुले छोड़ दी
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
More from Khurram Afaq
ख़ुद बुलाओ कि वो यूँँ घर से नहीं निकलेगा यहाँ इनआ'म मुक़द्दर से नहीं निकलेगा ऐसे मौसम में बिना काम के आया हुआ शख़्स इतनी जल्दी तेरे दफ़्तर से नहीं निकलेगा
Khurram Afaq
21 likes
अब ऐसे ज़ाविए पर लौ रखी जाने लगी है चराग़ों के तले भी रौशनी जाने लगी है नया पहलू सलीक़े से बयाँ करना पड़ेगा कहानी अब तवज्जोह से सुनी जाने लगी है
Khurram Afaq
25 likes
बुरा बनता हूँ कि शायद ऐसे वो मिरे सामने अच्छा बन जाए
Khurram Afaq
21 likes
नताएज जब सर-ए-महशर मिलेंगे मोहब्बत के अलग नंबर मिलेंगे तुम्हारी मेज़बानी के बहाने कोई दिन हम भी अपने घर मिलेंगे
Khurram Afaq
21 likes
किए कराए का सारा हिसाब दूँगा मैं सवाल जो भी करोगे जवाब दूँगा मैं ये रख-रखाव कभी ख़त्म होने वाला नहीं बिछड़ते वक़्त भी तुझ को गुलाब दूँगा मैं
Khurram Afaq
33 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Khurram Afaq.
Similar Moods
More moods that pair well with Khurram Afaq's sher.







