sherKuch Alfaaz

बड़े अदब से बड़ी शराफ़त से देखता हूँ मैं उस की जानिब बड़ी तबीअत से देखता हूँ वो जाते जाते मुझे पलट कर के देखता तो ये देख लेता कि मैं मोहब्बत से देखता हूँ

Related Sher

More from Ankit Yadav

वो जिस लिहाज़ से दुश्मन समझ रही है हमें हम उस लिहाज़ से तो वुल्वरीन होते हैं

Ankit Yadav

0 likes

शहर-ए-मशहूर जा रहा है कोई हो के मजबूर जा रहा है कोई खिड़कियाँ पास आती जा रही हैं या'नी अब दूर जा रहा है कोई

Ankit Yadav

0 likes

साथ में एक चाय पीने में तू बता दे कि तेरा क्या जाए

Ankit Yadav

1 likes

मोहब्बत में महारत है हमें बस की नहीं है हसीं चेहरा खुली ज़ुल्फ़ें लटें बस की नहीं है अभी करनी है तो कर ले मोहब्बत कम या ज़्यादा मुझे मालूम है तू बा'द में बस की नहीं है

Ankit Yadav

0 likes

तुम ने देखी हैं कभी ग़ौर से आँखें उस की तय किया है कभी इक बार में मीलों का सफ़र चाँदनी रात में रखते नहीं लहरों का भरम चाँदनी रात में करते नहीं झीलों का सफ़र

Ankit Yadav

1 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Ankit Yadav.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Ankit Yadav's sher.