sherKuch Alfaaz

मोहब्बत में महारत है हमें बस की नहीं है हसीं चेहरा खुली ज़ुल्फ़ें लटें बस की नहीं है अभी करनी है तो कर ले मोहब्बत कम या ज़्यादा मुझे मालूम है तू बा'द में बस की नहीं है

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कुछ इस अदास आज मेरी ओर देखती है वो कि लग रहा है मुद्दतों के बा'द में मिली है वो वो सोचती है मेरा पहला पहला इश्क़ है मगर अब उस से क्या कहूँ कि मेरा जिस्म आख़िरी है वो

Ankit Yadav

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उस के पहलू में रात होती है बात करने पे बात होती है वैसे टाइम का कुछ पता तो नहीं हाँ मगर पौने सात होती है

Ankit Yadav

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ईमान तो दो कौड़ियों के भाव में बिकता मगर जो बेचने वाला था वो इस बार माना ही नहीं

Ankit Yadav

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होता है आख़िरी जज़्बे की तरह पहला इश्क़ आख़िरी इश्क़ तो पहले की तरह होता है

Ankit Yadav

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तेरा ख़ामोश हो जाना बड़ा महसूस होता था मैं तुझ सेे क्या कहूँ अब और क्या महसूस होता था मेरा भी तेरे पहलू से ज़रा उकता गया था दिल तुझे भी दरमियाँ ये फ़ासला महसूस होता था

Ankit Yadav

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