मोहब्बत में महारत है हमें बस की नहीं है हसीं चेहरा खुली ज़ुल्फ़ें लटें बस की नहीं है अभी करनी है तो कर ले मोहब्बत कम या ज़्यादा मुझे मालूम है तू बा'द में बस की नहीं है
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कुछ इस अदास आज मेरी ओर देखती है वो कि लग रहा है मुद्दतों के बा'द में मिली है वो वो सोचती है मेरा पहला पहला इश्क़ है मगर अब उस से क्या कहूँ कि मेरा जिस्म आख़िरी है वो
Ankit Yadav
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उस के पहलू में रात होती है बात करने पे बात होती है वैसे टाइम का कुछ पता तो नहीं हाँ मगर पौने सात होती है
Ankit Yadav
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ईमान तो दो कौड़ियों के भाव में बिकता मगर जो बेचने वाला था वो इस बार माना ही नहीं
Ankit Yadav
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होता है आख़िरी जज़्बे की तरह पहला इश्क़ आख़िरी इश्क़ तो पहले की तरह होता है
Ankit Yadav
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तेरा ख़ामोश हो जाना बड़ा महसूस होता था मैं तुझ सेे क्या कहूँ अब और क्या महसूस होता था मेरा भी तेरे पहलू से ज़रा उकता गया था दिल तुझे भी दरमियाँ ये फ़ासला महसूस होता था
Ankit Yadav
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