शहर-ए-मशहूर जा रहा है कोई हो के मजबूर जा रहा है कोई खिड़कियाँ पास आती जा रही हैं या'नी अब दूर जा रहा है कोई
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों मोहब्बत करने वाला जा रहा है
Rahat Indori
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उस के पहलू में रात होती है बात करने पे बात होती है वैसे टाइम का कुछ पता तो नहीं हाँ मगर पौने सात होती है
Ankit Yadav
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बड़े अदब से बड़ी शराफ़त से देखता हूँ मैं उस की जानिब बड़ी तबीअत से देखता हूँ वो जाते जाते मुझे पलट कर के देखता तो ये देख लेता कि मैं मोहब्बत से देखता हूँ
Ankit Yadav
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वो जिस लिहाज़ से दुश्मन समझ रही है हमें हम उस लिहाज़ से तो वुल्वरीन होते हैं
Ankit Yadav
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पहले उस का चेहरा देखो और फिर उस की आँखें देखो चेहरा तो घाइल करता है आँखें पागल कर देती हैं
Ankit Yadav
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उसे छोड़ो हमारे हाथ का बिगड़ा हुआ है वो हमारे हाथ के बिगड़े हुए बर्तन नहीं बनते
Ankit Yadav
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