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वो जिस लिहाज़ से दुश्मन समझ रही है हमें हम उस लिहाज़ से तो वुल्वरीन होते हैं

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उस के पहलू में रात होती है बात करने पे बात होती है वैसे टाइम का कुछ पता तो नहीं हाँ मगर पौने सात होती है

Ankit Yadav

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उसे छोड़ो हमारे हाथ का बिगड़ा हुआ है वो हमारे हाथ के बिगड़े हुए बर्तन नहीं बनते

Ankit Yadav

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मोहब्बत में महारत है हमें बस की नहीं है हसीं चेहरा खुली ज़ुल्फ़ें लटें बस की नहीं है अभी करनी है तो कर ले मोहब्बत कम या ज़्यादा मुझे मालूम है तू बा'द में बस की नहीं है

Ankit Yadav

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बड़े अदब से बड़ी शराफ़त से देखता हूँ मैं उस की जानिब बड़ी तबीअत से देखता हूँ वो जाते जाते मुझे पलट कर के देखता तो ये देख लेता कि मैं मोहब्बत से देखता हूँ

Ankit Yadav

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वो अक्सर एहतियातन ही नहीं मिलता किसी से मुलाक़ातें बताती हैं कि घाइल लिस्ट में था महीनों बा'द वो आँखें वो नंबर याद आया वो इक चेहरा न जाने कब से डायल लिस्ट में था

Ankit Yadav

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