sherKuch Alfaaz

उसे छोड़ो हमारे हाथ का बिगड़ा हुआ है वो हमारे हाथ के बिगड़े हुए बर्तन नहीं बनते

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वो जिस लिहाज़ से दुश्मन समझ रही है हमें हम उस लिहाज़ से तो वुल्वरीन होते हैं

Ankit Yadav

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उस के पहलू में रात होती है बात करने पे बात होती है वैसे टाइम का कुछ पता तो नहीं हाँ मगर पौने सात होती है

Ankit Yadav

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ये तेज़ कार मिरी जान गर इजाज़त दो तो सिर्फ़ सौ नहीं दो सौ के पार जाएगी

Ankit Yadav

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बड़े अदब से बड़ी शराफ़त से देखता हूँ मैं उस की जानिब बड़ी तबीअत से देखता हूँ वो जाते जाते मुझे पलट कर के देखता तो ये देख लेता कि मैं मोहब्बत से देखता हूँ

Ankit Yadav

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मैं ने इन नीली आँखों के नक़्श-अयाँ तक जाना है या'नी इक गहरे दरिया के पार निशाँ तक जाना है उस के दिल की एक गली में घूम रहा हूँ उस के साथ और वो मुझ सेे पूछ रही है और कहाँ तक जाना है

Ankit Yadav

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