अब दोस्त कोई लाओ मुक़ाबिल में हमारे दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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न जाने कैसी महक आ रही है बस्ती से वही जो दूध उबलने के बा'द आती है
Munawwar Rana
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इतनी तवक़्क़ुआत ज़माने को हम सेे है उतनी तो उम्र भी नहीं लाए लिखा के हम
Munawwar Rana
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तुम भी साबित हुए कमज़ोर मुनव्वर राना ज़िन्दगी माँगी भी तुम ने तो दवा से माँगी
Munawwar Rana
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ख़ामुशी कब चीख़ बन जाए किसे मालूम है ज़ुल्म कर लो जब तलक ये बे-ज़बानी और है
Munawwar Rana
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उम्र भर साँप से शर्मिंदा रहे ये सुन कर जब से इंसान को काटा है तो फन दुखता है
Munawwar Rana
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