बैठा है मुफाईलु में ग़ज़लों को सजाने फिर क्या तुझे अब और जगह काम नहीं है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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तश्त-अज़-बाम तो आज भी हूँ हाँ मैं बदनाम तो आज भी हूँ कुछ हो कोशिश मैं करता रहूँगा वरना नाकाम तो आज भी हूँ
Jagat Singh
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नहीं है कोई तेरे लौट के आने का अब आसार न जाने फिर भी क्यूँ मैं रोज़ तेरी राह तकता हूँ
Jagat Singh
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नज़र आना तेरा चेहरा मेरे जीने का साधन है तुझे बस मुड़ के तकना है मुझे साँसें चलानी हैं
Jagat Singh
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बना तो रही है तू ये रिश्ता लेकिन तुझे बा'द में गर न भाया मैं तो फिर
Jagat Singh
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मन के सारे सपने सपने रह गए कितने थे हम और कितने रह गए जल चुका सब फिर भी ऐसा लगता है कोयले कुछ अब भी तपने रह गए
Jagat Singh
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