bas ek sham ka har sham intizar raha magar wo sham kisi sham bhi nahin aai
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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ये उदासी का सबब पूछने वाले 'अजमल' क्या करेंगे जो उदासी का सबब बतलाया
Ajmal Siraj
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है बताने की कोई चीज़ भला नाम-ओ-नसब हम ने पूछा न कभी नाम-ओ-नसब बतलाया
Ajmal Siraj
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भरता भी क्यूँँ कि ज़ख़्म था तेरे फ़िराक़ का फिर हम ने तेरी याद को मरहम समझ लिया
Ajmal Siraj
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बस एक शाम का हर शाम इंतिज़ार रहा मगर वो शाम किसी शाम भी नहीं आई
Ajmal Siraj
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हम समझते थे कि हम उस को भुला सकते हैं वो समझता था हमें भूल नहीं पाएगा वो
Ajmal Siraj
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