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ये उदासी का सबब पूछने वाले 'अजमल' क्या करेंगे जो उदासी का सबब बतलाया
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@ajmal-siraj
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ये उदासी का सबब पूछने वाले 'अजमल' क्या करेंगे जो उदासी का सबब बतलाया
है बताने की कोई चीज़ भला नाम-ओ-नसब हम ने पूछा न कभी नाम-ओ-नसब बतलाया
भरता भी क्यूँँ कि ज़ख़्म था तेरे फ़िराक़ का फिर हम ने तेरी याद को मरहम समझ लिया
हम समझते थे कि हम उस को भुला सकते हैं वो समझता था हमें भूल नहीं पाएगा वो
बस एक शाम का हर शाम इंतिज़ार रहा मगर वो शाम किसी शाम भी नहीं आई
आरज़ूओं का मरकज़ था दिल हसरतों में घिरा रह गया
मैं ने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है और तू है कि मिरी जान को आया हुआ है
बदल जाएँगे ये दिन रात 'अजमल' कोई ना-मेहरबाँ कब तक रहेगा
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