बस ज़रा देर को बाग़ में बैठी वो पेड़ पौधे भी ग़ज़लें सुनाने लगे फूल भी ख़ास भाते न थे हम को पर साथ तुम थी तो काँटे सुहाने लगे
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़िन्दगी की उलझनों की फ़िक्र करना छोड़ कर हम तेरी ज़ुल्फों में उलझने की तमन्ना कर रहे हैं
Alankrat Srivastava
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याद उस को भी मेरी तड़पाएगी देखना वो लौट कर के आएगी
Alankrat Srivastava
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कर तुम्हारी बात प्यारी चाँद तारों को जलाया जा रहा है तुम नहीं हो पर तुम्हारी कल्पना में गीत गाया जा रहा है
Alankrat Srivastava
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हमें पूछो कठिन कितना किसी का दिल चुराना है उन्हें क्या है उन्हें तो बस ज़रा का मुस्कुराना है
Alankrat Srivastava
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ये अजब दौर है, सब जहाँ पर अभी "लिख रहे" हैं ग़ज़ल "कह रहे हैं" नहीं
Alankrat Srivastava
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