बे-गिनती बोसे लेंगे रुख़-ए-दिल-पसंद के आशिक़ तिरे पढ़े नहीं इल्म-ए-हिसाब को
sherKuch Alfaaz
Haidar Ali Aatish15 Likes
Related Sher
हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले कितने प्यारे हैं मुझे छोड़ के जाने वाले ज़िंदगी भर की मोहब्बत का सिला ले डूबे कैसे नादाँ थे तिरे जान से जाने वाले
Vipul Kumar
53 likes
दिल में और दुनिया में अब नहीं मिलेंगे हम वक़्त के हमेशा में अब नहीं मिलेंगे हम
Jaun Elia
62 likes
आज है उन को आना, मज़ा आएगा फिर जलेगा ज़माना, मज़ा आएगा तीर उन की नज़र के चलेंगे कई दिल बनेगा निशाना मज़ा आएगा
Bhaskar Shukla
44 likes
मैं रस्मन कह रहा हूँ ''फिर मिलेंगे'' ये मत समझो कि वा'दा कर रहा हूँ
Zubair Ali Tabish
96 likes
रुके रुके से क़दम रुक के बार बार चले क़रार दे के तिरे दर से बे-क़रार चले
Gulzar
36 likes
More from Haidar Ali Aatish
Similar Writers
Our suggestions based on Haidar Ali Aatish.
Similar Moods
More moods that pair well with Haidar Ali Aatish's sher.







