भारत के उपकार को, मान रहे सब लोग रोग 'घटाने' के लिए, दिया विश्व को 'योग'
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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रोते बच्चे पूछ रहे हैं मम्मी से कितना पानी और मिलाया जाएगा
Divy Kamaldhwaj
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सँभलने के लिए कर ली मुहब्बत मगर इस में फिसलना चाहिए था
Divy Kamaldhwaj
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बहुत कुछ बोलना है पर अभी ख़ामोश रहने दो ख़मोशी बोलती है तो, बड़ी आवाज़ करती है
Divy Kamaldhwaj
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है उस के पास हीरे की अँगूठी हमारे पास में ग़ज़लें है जानाँ
Divy Kamaldhwaj
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नहीं लगता कहीं भी दिल हमारा सभी को आज़माते फिर रहे हैं
Divy Kamaldhwaj
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