भूलना चाहा अगर उस को कभी और भी वो याद आया देर तक
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वो नहीं मेरा मगर उस से मोहब्बत है तो है ये अगर रस्मों रिवाजों से बग़ावत है तो है
Deepti Mishra
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दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता
Waseem Barelvi
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कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी
Javed Akhtar
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ज़िक्र हर-सू बिखर गया उस का कोई दीवाना मर गया उस का उस ने जी भर के मुझ को चाहा था और फिर जी ही भर गया उस का
Zubair Ali Tabish
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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
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देखा है बिछड़ कर के बिछड़ने का असर भी मुझ पर तो बहुत होता है उस पर नहीं होता
Nawaz Deobandi
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सच बोलने के तौर-तरीक़े नहीं रहे पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे
Nawaz Deobandi
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अंजाम उस के हाथ है आग़ाज़ कर के देख भीगे हुए परों से ही परवाज़ कर के देख
Nawaz Deobandi
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वो पूछते फिरते हैं मेरे बारे में सब सेे इक मेरा भी शाइ'र है उसे तुम ने सुना क्या?
Nawaz Deobandi
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सच्चाई को अपनाना आसान नहीं दुनिया भर से झगड़ा करना पड़ता है
Nawaz Deobandi
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