बिछड़ने वाले में सौ ऐब थे मगर 'फ़रहाद' वो बद-दिमाग़ मेरा मसअला समझता था
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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तुझ सा है मेरी जान मगर तू तो नहीं है ये फूल तेरी कितनी कमी पूरी करेगा
Ahmad Farhad
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मैं ठीक सोचता हूँ कोई हद मेरे लिए मैं साफ़ देखता हूँ मुझे मार दीजिए
Ahmad Farhad
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बहुत मुद्दत के बा'द आई है बारिश और उस ज़ालिम के पेपर चल रहे हैं
Ahmad Farhad
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किसे ख़बर थी दरख़्तों का ये कटाव कभी हमारे हल्क़ा-ए-अहबाब तक भी आएगा
Ahmad Farhad
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तू कौन है जो उस की कमी पूरी करेगा वो आएगा तो अपनी कमी पूरी करेगा
Ahmad Farhad
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