तुझ सा है मेरी जान मगर तू तो नहीं है ये फूल तेरी कितनी कमी पूरी करेगा
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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किसे ख़बर थी दरख़्तों का ये कटाव कभी हमारे हल्क़ा-ए-अहबाब तक भी आएगा
Ahmad Farhad
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जो ज़ख़्म बाँटते हैं उन्हें ज़ीस्त पे है हक़ मैं फूल बाँटता हूँ मुझे मार दीजिए
Ahmad Farhad
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मैं ठीक सोचता हूँ कोई हद मेरे लिए मैं साफ़ देखता हूँ मुझे मार दीजिए
Ahmad Farhad
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बहुत मुद्दत के बा'द आई है बारिश और उस ज़ालिम के पेपर चल रहे हैं
Ahmad Farhad
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बिछड़ने वाले में सौ ऐब थे मगर 'फ़रहाद' वो बद-दिमाग़ मेरा मसअला समझता था
Ahmad Farhad
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