जो ज़ख़्म बाँटते हैं उन्हें ज़ीस्त पे है हक़ मैं फूल बाँटता हूँ मुझे मार दीजिए
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तुझ सा है मेरी जान मगर तू तो नहीं है ये फूल तेरी कितनी कमी पूरी करेगा
Ahmad Farhad
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किसे ख़बर थी दरख़्तों का ये कटाव कभी हमारे हल्क़ा-ए-अहबाब तक भी आएगा
Ahmad Farhad
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मैं ठीक सोचता हूँ कोई हद मेरे लिए मैं साफ़ देखता हूँ मुझे मार दीजिए
Ahmad Farhad
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बहुत मुद्दत के बा'द आई है बारिश और उस ज़ालिम के पेपर चल रहे हैं
Ahmad Farhad
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बिछड़ने वाले में सौ ऐब थे मगर 'फ़रहाद' वो बद-दिमाग़ मेरा मसअला समझता था
Ahmad Farhad
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