बिछड़े हुए तो एक ज़माना हुआ मगर वो शख़्स मेरी आँख से ओझल नहीं हुआ
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हम को मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है
Rajesh Reddy
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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माज़ी भी है उदास मेरे हाल की तरह ये साल भी गुज़र गया हर साल की तरह
Saqi Amrohvi
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मैं तुझ को भूल जाऊँ मगर मसअला ये है कैसे कटेगी उम्र तेरी याद के बग़ैर
Saqi Amrohvi
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ज़िंदगी भर मुझे इस बात की हसरत ही रही दिन गुज़ारूँ तो कोई रात सुहानी आए
Saqi Amrohvi
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मैं ने आ'साब को पत्थर का बना रक्खा है एक दिल है कि जो बनता नहीं पत्थर जैसा हम फ़क़ीरों को कभी रास न आया वरना हम ने पाया था मुक़द्दर तो सिकंदर जैसा
Saqi Amrohvi
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मैं वो चराग़ हूँ जो आँधियों में रौशन था ख़ुद अपने घर की हवा ने बुझा दिया है मुझे
Saqi Amrohvi
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